Saturday, May 9, 2020

सुपरपॉवर देश भगवान की शरण मे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में कराया पूजा-पाठ एंव वैदिक मंत्रोच्चारण।

सुपरपॉवर भगवान की शरण मे।
ईसाई बहुलता वाले  देश में ..............अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश  पर कोरोना महामारी से उपजी निराशा और नकारात्मकता से बचाव हेतु  यजुर्वेद के मंत्रो के जरिये की गयी शांति प्रार्थना !

इस शांति पाठ के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद न्यू जर्सी के बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर के पुजारी हरीश ब्रह्मभट्ट को आमंत्रण भेजा था !

पहले संस्कृत में श्लोक पढ़ें फिर अंग्रेजी में समझाया

ब्रह्मभट्ट ने रोज गार्डन में शांति पाठ के दौरान संस्कृत में श्लोक पढ़ें और इसके बाद उन्होंने इस प्रार्थना का अंग्रेजी में अनुवाद किया. ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'यह प्रार्थना स्वर्ग में शांति की बात करती है. धरती और आसमान में, जल में, पेड़-पौधों पर शांति, फसलों पर शांति हो. ब्रह्म पर शांति से लेकर हर जगह शांति हो और ईश्वर करे कि हम यह शांति महसूस कर सकें. ओम शांति, शांति, शांति.'

ट्रंप ने प्रार्थना कराने के लिए ब्रह्मभट्ट का शुक्रिया अदा किया. अपनी टिप्पणी में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस के दिन, अमेरिका बेहद भयावह बीमारी के खिलाफ उग्र जंग में उलझा हुआ है. उन्होंने कहा कि इतिहास में भी, हर प्रकार के चुनौतीपूर्ण समय में अमेरिकियों ने धर्म, आस्था, प्रार्थना और ईश्वरीय शक्ति पर भरोसा किया है. प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने कोविड-19 के कारण अपने प्रियजनों को गंवाने वाले परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की !
ये बताना यहाँ आवश्यक है कि अमेरिका में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख से ज्यादा हो चुकी है, और मौतों का आंकड़ा 75000 पार कर चुकी है। 
अमेरिका की बेरोजगारी दर अप्रैल में 1929 के बाद सबसे उच्च स्तर पर है।
अमेरिका में कोरोना वायरस महामारी से उपजे आर्थिक संकट से अप्रैल में बेरोजगारी दर अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। इसके 1929 की महामंदी के बाद सबसे अधिक रहने की आशंका है। आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी फैक्टसेट के मुताबिक, अप्रैल की बेरोजगारी दर 16 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। जबकि मार्च में यह 4.4 प्रतिशत थी। अर्थशास्त्रियों के हिसाब से अप्रैल में 2.1 करोड़ या उससे अधिक नौकरियों की कटौती की आशंका है। यदि ऐसा होता है, तो इसका मतलब 2008 में आई मंदी के बाद रोजगार के मोर्चे पर जितनी वृद्धि दर्ज की गयी, वह सब एक महीने में खत्म हो जाएगी

4 comments:

  1. अभी स्थिति और भी भयावह हो सकती है... शायद अब सभी देशों को फिर से नई शुरुआत करनी होगी

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  2. यह हम भारतीयों के लिए सन्देश है....की हमारे वेदों से उत्तम कुछ भी नहीं हैं...और वेदों की ओर लौटने का सही समय है....जय हो 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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